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کہانی : آخری گجرا کتھا کار: جاوید انور، پاکستان ہندی انوواد: صدف اقبال، ایم کے بجاج

کہانی : آخری گجرا
کتھا کار: جاوید انور، پاکستان
ہندی انوواد: صدف اقبال، ایم کے بجاج

आखरी गजरा
जावेद अनवर , पाकिस्तान
अनुवाद ;
सदफ़ एकबाल , एम के बजाज
………………..

और फिर हमारी शादी हो गई.
रज़िया मेरे ख्वाबों की शहज़ादी थी.
लेकिन ख्वाब तो सभी के होते हैं और ख्वाबों की शह्ज़दियाँ भी !
मेरे पास था किया उसे देने को? फिर भी वह खुश थी कि जो कुछ छोड़ कर आ रही थी वह भी किसी को शहज़ादी नहीं बना सकता ! बस ख्वाबों की शहज़ादी ही बना सकता था!
चाचे फज़लदीन की रज्जो मेरे ही नहीं , मेरे जैसे बहुत से गए गुज़रे शह्जादों के ख्वाबों की शहज़ादी थी और हम भी बस शह्जादे ही थे!
अपनी माँ के शह्जादे, तंग कीचड भरी गलियों, बदबूदार खुली नालियों और उनके किनारे पड़े पखाने पर भिनभिनाती मक्खीयों के आदी ,बिना मुंह धोये सारा दिन आवारा गर्दी करने वाले शह्जादे!
एक दिन स्कूल और दो दिन बाबा मलंग शाह के मजार दरबार पर आवारा घूम कर लौट आने वाले शह्जादे!
एक एक किलास में कई कई साल गुज़र कर उस्तादों से व्यंगात्मक उपाधि प्राप्त करने वाले शेह्जादे!
हम ही जैसों को लोग कहते हैं !
“ओ ,जा तु भी शह्जादा ही है.”
खैर!
इन हालात में रज्जो अगर मेरे ख्वाबों की शहज़ादी थी तु किसी का इस पर कया विरोध हो सकता था ! कोई मुझे और रज्जो को किस लिए जानने लगा कि एतराज़ की नौबत आये !
और जो हमें जानते थे वह मेरे ही जैसे शह्ज़दे थे ! जिनके ख्वाबों की शह्जादियाँ भी बस रज्जो जैसी ही थीं !
“ओ,जा , तु भी शहज़ादी ही है.”
अब्बा की खील मरोंडे की छाबड़ी से घर जैसे तैसे चल रहा था और सच तो यह है कि बड़ी मुश्किल से चल रहा था !
किसी ने कहा कि गन्ने बेचने के काम में आधिक पैसे मिलते हैं ! बस अब्बे ने शाम को चाचे करमदाद से गंदेरियां छीलना सीखना शुरू कर दिया ! एक हफ्ते की ट्रेनिंग काफी थी ! देहातों से पूने गन्ने से लड़ी ट्रालियां ट्रैक्टरों के पीछे भागती हरे हरे, लम्बे और मोटे, रसभरे गन्ने लातें तो अब्बा मंडी से दो गट्ठे सुबह ही सुबह खरीद कर साइकिल पर लाद लाता ! छील छाल कर गंद्देरियां बनाई जातीं !
अब्बे ने मास्टर गुलाम नबी से लकड़ी का ठेला मुनासिब किराये पर ले लिया था !मीठी गनडेरियों को टोके से कटाक कटाक काट कर ढेर लगा लिया जाता ! अब्बा रेड़ी पर लाल रंग का प्लास्टिक बिछाता, बर्फ का बड़ा सा टुकड़ा जमा कर उसके ऊपर मीठी गंडेरी एक कतार पर दूसरी सजाता ! इस साज सज्जा के बाद शह्बाज़ की दुकान से खरीदी , देसी गुलाब की खुशबूदार ताज़ा पत्तियों का छिडकाव कर दिया जाता ! तराजू बाट ठेले के नीचे बंधे कपडे में रखे जाते ! फिर छीले हुए गन्ने के लम्बे टोट ठेले के निचले खाने में टिकाये जाते ! गंडेरी की मीठास पर मधु मखियाँ और भड़ उमड़ उमड़ आते ,मीठास चाटते , काटे बिना उड़ जाते !
जीवन के पल ,पहर ,दिन और महीने साल गुज़रते चले गए ! उम्र ऐसे कटती गई जैसे अब्बे की गंदेरियां !
कट कटाकट, कट , कट कटाकट ……..
और अब्बे की टोके की कट कटाकट के सर पर हमारा सारा घर धमाल डालता रहा !
कट कटाकट, कट कटाकट….
धमाधम , धमाधम…
अब्बा जो काम कर लता कमा कर अम्मा के हाथ पर रखता !
मैं ने कभी अब्बे को अम्मा से नाराज़ होते,चीखते चिल्लाते नहीं देखा !
अब्बा रात को ठेला धकेलता थका थकाया आता ! अब्बे के ठेले के साथ ही साथ,उससे आगे ही आगे छिले गन्नों की बोझल मीठी खुशबु हमारी कोठरी में आ घुसती!
अम्मा अगर लेटी होती तो भी तुरंत उठ जाती ! आगे बढ़ कर अब्बे के ठेला का अगला किनारा पकड़ कर ठेला घर की देहलीज़ पार कराने में अब्बे की मदद करती! महकते कच्चे आँगन में हलकी लकीरें बनाता ठेला सेहन के अंतिम छोर पर अपनी जगह टिक जाता ! अब्बा बची हुई बर्फ और गंदेरियां सबसे पहले अम्मा के हवाले करता ! अम्मा उक भर गंदेरियां मुझे और उक भर मेरी छोटी बहिन को देती ! अगर फिर भी कुछ बच रहतीं तो गीली बोरी में लपेट कर कोठरी के कोने में बिछे प्लास्टिक पर सजा कर रखतीं ! मुझे याद नहीं कि कोई एक दिन भी ऐसा गुज़रा हो जो अब्बा हमारे लिए ,हमारे हिस्से की गनेदियाँ न लाया हो !
अब्बा अपने सर का पटका खोल कर झाड़ता और सर पर हाथ फेर कर अपने छिद्रे बालों को सहलाता !
जूता उतार कर जोर जोर से उसे ठोंक कर उसमें से दिन भर की थकन और गर्द निकलता, फिर चारपाई के नीचे रख देता !
अब्बा कुछ देर नंगे पैर फिर कर अपने पैर सहलाता और फिर जेब में हाथ डाल कर दिन भर की कमाई रक़म अम्मा की हथेली पर रख देता !
ले भई, भली लोक ! आज की “ वटक”.”
अम्मा बिस्मिल्लाह पढ़ कर गिन कर रुपये अलग करती और अब्बे को दे कर थोड़े से बचे हुए पैसे पल्लू में बांध लेती ! उनमें से बिजली, गैस, पानी, दूध, राशन, दावा-दारू, हमारी फीस, किताब कापी, कपडा-लत्ता, लेना-देना, जाने किया किया भुगतना पड़ता !
हम दो ही बहन भाई थे, जो किसी प्रकार के परिवार नियोजन के कारण नहीं, बल्कि किसी शारीरिक बीमारी की कारस्तानी थी ! इस बात पर अब्बा खुश था न नाराज़ ! अम्मा कभी कभी अफ़सोस करती कि मेरा कोई भाई न था जो बाजों बनता और गुड्डू की कोई बहन न थी जो सहेली बनती ! व्यक्तगित तौर पर मुझे न कभी भाई की कमी खली, कि मोहल्ला मेरे यारों से भरा पड़ा था, और न दूसरी बहन की ज़रुरत महसूस हुई !
गुड्डो मुझे इतनी प्यारी थी कि मेरा सारा धयान और सारा प्यार भी उसके लिए कम था !
अगर अबतक की मेरी कथा कहानी से कोई यह आभास ले कि हम बहुत मज़े में थे और कोई खास समस्या नहीं थी तो यह भयंकर भूल होगी !
अम्मी की कढाई से जमा रक़म भी ख़त्म हो जाती तो हमें पता चल जाता कि कल नाश्ते में दही नहीं मिलेगी और पराठे की जगह सूखी रोटी होगी !वह भी संभवतः रात की बची हुई, बासी !
हमें इस स्थिति से समझौता करने की आदत हो गई थी ! हम जानते थे कि बस यही कुछ संभव है जो अम्मा और अब्बा अपनी जान मार कर हमें उपलब्ध करा सकते थे ! वह न हम से कुछ छुपाते थे और न बचाते थे ! सब दुःख सुख सांझा था तो गिला किया ,शिकायत कैसी?
मगर बात तो मेरी और रज्जो की हो रही थी !हम किधर अब्बे और अम्मा की कहानी ले बैठे ! वह तो पता नहीं किस मिट्टी के बने थे ! लेकिन थे किसी एक ही मिट्टी के ,यह तो हम भी जान गए थे !
मैं ने अब्बे और अम्मी को खूब खूब तंग किया ! अब्बे मेहनत की कमाई की फीस बर्बाद करते कुछ शर्म नहीं आई ! बस मस्त था, अपने हमजोलियों में यूँ भागा फिरता जैसे ज़िन्दगी मजाक ही हो ! हर छितिज पर आकाशगंगा नज़र आती थी ! हर मृगतृष्णा ठाठें मारता दरिया बल्कि समुन्द्र दिखता था !
गुड्डू मुझ से छोटी थी, पांचवीं पास करके घर बैठ गई और माँ की मददगार बन गई !
कहते हैं लड़कियां जल्दी बड़ी हो जाती हैं ! गुड्डू अभी कुछ अधिक भी बड़ी नहीं हुई थी कि नजीर की डोली में बिठा दी गई ! नजीर का कस्बा हमारे शहर से अधिक दूर नहीं था, फिर भी इतनी दूर ज़रूर था कि गुड्डू चाहते हुए भी हमें चार छ महीने से पूर्व मिलने नहीं आ पाती ! अपने वालिद की मौत के बाद, अपनी शादी से पहले ही नजीर अपने वालिद का छोटा सा साइकिल पंक्चर का अड्डा अकेला चला रहा था ! बहुत कष्ट से घर का खर्च पूरा करता ! गुड्डू के आ जाने से उसे घर की चिंता कम हो गई कारण यह था कि गुड्डू छोटी उम्र की होने के बावजूद बड़ी सुघड़ गृहस्तिन निकली ! उसके जिम्मेवारी उठाने की सलाहियत ने उसे अपनी ससुराल में इतना महत्वपूर्ण बना दिया कि नजीर और उसकी माँ को लगता गुड्डू दायें से बाएं हुई तो उनका घर गिर पड़ेगा !
मुझे गुड्डू में अम्मा की झलक नज़र आती !
अब्बे और अम्मी को इस बात की खुशी और सकून था कि गुड्डू अपने घर में इतनी महत्वपूर्ण बन गई है ! शादी के शुरू में उनका दुःख देखा नहीं जाता था ! धीरे धीरे वह बहुत बड़ी कमी झेल गए !
मेरी आवारागर्दी और अब्बे की कट कटा कट ….मेरी ज़िन्दगी बहुत मज़े से गुज़र रही थी !
चाचे फ़ज़लदीन की अब्बे से यारी न होती और मेरी अम्मी को वह छोटी बहन न समझता तो मुझ जैसे लापरवाह लड़के को रज्जो का एक बाल भी उखाड़ कर नहीं देता !
रज्जो अम्मा की लाडली बन गई !
गुड्डू के हिस्से की उक भर गनेदियाँ अब हर रात रज्जो का हिस्सा बनतीं !
न बना तो मैं, कुछ न बना !
बस” शहजादे का शहजादा “ ही रहा !
लापरवाह, खलंडरा !
किसी के अब्बा को मरना नहीं चाहिए !
और फिर मेरे अब्बा जैसे अब्बे को तो कभी भी नहीं मरना चाहिए !
इसलिए जब ऐसे अब्बा मारते हैं तो फिर अम्मियाँ भी ज़ियादा देर जीवित नहीं रहतीं !
मेरे अब्बे ने ने मेरे साथ यही कुछ किया !
एक शाम चंगा भला काम से वापस आया ! हमारी ओक भर गंदेरियां हम तक पहुँचीं ! अम्मा की दिनचर्या समाप्त हुई ! रात का खाना खा कर सुबह की तयारी करके अब्बा छत पर जा सोया !
सुबह धुप चढ़ आई , पर अब्बा नहीं उठा ! अम्मी ने मुझे कहा कि अब्बे को जगा ! उठे गा तो वक़्त पर गंदेरियां काट कर तयारी करेगा ! न जगाया तो गुस्सा होगा कि सारा दिन ख़राब कर दिया ! संभवतः बहुत थक कर सोया है, जो सोया ही पड़ा है ! अम्मा पराठे बनाने की तयारी में लग गई !मैं सीढयाँ फलांगता छत पर अब्बे को जगाने गया ! देखा कि वह चारपाई पर चित लेटा था ! डब्बियों वाला खीस चारपाई से नीचे कच्ची छत पर गिरा है !
मैं ने माथे पर हाथ रख कर आवाज़ दी तो अब्बा उठा ही नहीं !
फिर मेरा अब्बा कभी नहीं उठा !
कभी नहीं !
देशी गुलाब की पत्तियों से ढका महकता जनाज़ा उठा तो अम्मा, गुड्डू और रज्जो तड़प कर साथ हो लीं ! मोहल्ले की औरतें बहुत मुश्किल से उन्हें गली के नुक्कड़ से वापिस लेकर आई !
उनका बस चलता तो अब्बे के साथ ही कब्रस्तान जा बसतीं !
फिर मैं भी घर किस लिए रहता !
अब्बे को दफ़नाने के लिए भाग दौड़ करनी पड़ी !
मोहल्ले का नजदीकी कब्रिस्तान, आस पास बड़ी पुरानी आबादी होने के कारण, क़ब्रों से भर चूका था ! जब मैं खेलता कूदता कभी कब्रिस्तान में जा निकलता तो सोचा करता कि मुर्दे इतने सामीप्य में कैसे रहते होंगे? करवट तक लेना कठिन होगा ! आज जब अब्बा कि कब्र के लिए जगह की ज़रुरत पड़ी तो समस्या खुल कर सामने आ गई !
ताज़ा कब्र के लिए जगह थी ही नहीं ! अब्बे के यारों ने गोरकन से साज़ बाज़ करके एक जगह ले ही ली ! जब अब्बे को दफ्न करने का समय आया तो मुझे लगा कि कब्र संभवत पुरानी है और छील छाल कर नई बनाई गई है ! मैं शोर मचने वाला ही था कि मुझे खेयाल आया कि अब्बा कौन सी सभी चीज़ें नई इस्तेमाल करता था ! कितनी ही बार उसने अनगिनत बार इस्तेमाल की हुई वस्तुओं के साथ बड़ी ख़ुशी से गुज़ारा किया था ! मुझे लगा अब्बे को इतनी मुश्किल से हासिल की गई किसी की पुरानी कब्र पर भी कोई आपत्ति नहीं होगी !
न मैं ने आपत्ति की, ना अब्बा की मैय्यत ने और हम दोनों ख़ुशी ख़ुशी उस जैसी तैसी कब्र से संतुष्ट हो गए !
एक बेकार सा विचार मेरे दिमाग में, इतने सदमे के बावजूद भी, जाने किधर से आ गया ! मेरी अम्मा की भी तो मेरे अब्बा से दूसरी शादी थी ! बिल्कुल छोटी उम्र में विधवा होने के बाद अब्बा से जो शादी हुई तो किसी कुंवारी दुल्हन को भी किया रास आई होगी जो उस विधवा को रास आई ! हम यह फैसला न कर पाए कि अब्बा अम्मा के साथ अधिक खुश और इत्मिनान से है या अम्मा अब्बा के साथ ! हमने तो कठिन से कठिन और अच्छे से अच्छे वक़्त दोनों को कंधे से कन्धा मिलाये एक आत्मा दो शरीर, निश्चिंत जीवन की नैया खेते देखा ! दोनों इस प्रकार एक दुसरे के लिए अनिवार्य थे कि किसी एक के बिना घर कल्पना नहीं की जा सकती थी !
अम्मा शादी के बाद शायद ही कभी मइके गई हों. एक बार नानी की बहुत जिद पर सात दिन के लिए गई तो अब्बा तीसरे ही दिन जा कर ले आया.,” हमारा घर नहीं चलता.”
यधपि गुड्डू अम्मा की मौजूदगी में भी खाना बना लेती थी ! जो अब्बा को पता भी नहीं चलता था कि माँ ने बनाया था या उसकी शागिर्दी में गुड्डू ने ! लेकिन जब अम्मा की गैर हाजरी में गुड्डू ने अब्बा को खाना दिया तो ऐसे लगा जैसे निवाले उसके गले से उतर ही नहीं रहे !
बोला,”गुड्डो बर्तन ले लो. तेरी अम्मा ने तुझे अपने जैसा खाना बनाना सिखाया ही नहीं.”
मैं और गुड्डू एक दुसरे को कनखियों से देख कर मुस्कुरा कर रह जाते !
अरे, बात फिर अम्मा और अब्बा की शुरू हो गई !
मुझे शायद और कोई बात ही नहीं आती !
अब्बा मरा तो अम्मा रोई नहीं !
बस अम्मा अम्मा न रही !
लगता जैसे कोई अजनबी आत्मा जाने पहचाने बुत को घसीटती फिरती है !
बेजान सी गुडिया की तरह डोलती, ठोकरें खाती, बेध्यान चलती फिरती !
सुबह उठती, नमाज़ पढ़ती और कब्रिस्तान रवाना हो जाती !अब्बे की कब्र पर खड़ी हो कर फातिहा पढ़ती, पढ़ती ही चली जाती ! खड़ी खड़ी ठाक जाती तो बैठ कर पढ़ती जाती ! बहुत धुप छद जाती तो वापसी की राह पकडती !खाना बस न खाने जैसा खाती ! कभी दो कौर ले लिए कभी वह भी नहीं ! अब्बे की दसवीं तक अम्मा आधी रह गई और चालीसवें तक वह चारपाई से सट कर रह गई !
अब्बे के जाने के ठीक दो महीने और चार दिन के बाद अम्मा भी विदा हुई !
अम्मा के लिए कब्र का बंदोबस्त अब्बा के दोस्तों ने ही किया ! अब्बा की कब्र से आठ दस क़ब्रों की दूरी पर एक कब्र की जगह बनाई गई !
अब्बा और अम्मा के मरने के बाद मैं और रज्जो लावारिस हो गए ! अब्बा था तो मैं लगभग बेकार ही था ! अधिक से अधिक गन्ने छीलने और गंदेरियां काटने ने अब्बा की कभी कभार मदद कर दिया करता था ! अब्बा ठेला ले कर बाज़ार निकल जाता और मैं आवारा गर्दी को ! अब्बे अधिक क्रोध करने वाले नहीं थे ! बस मुझे आराम से और बार बार समझाता कि मेरी शादी हो चुकी थी और मुझे जिम्मेवार होना चाहिए ! मैं सर नीचे करके सुन लेता और कोई प्रभाव नहीं लेता !
अम्मा अलबत्ता अधिक जोर देती और शर्म दिलाती कि शादी शुदा होकर भी मैं गैरजिम्मेवार था! कल को बच्चे पैदा हो जायेंगे तो ज़रुरत भी बढ़ जाएगी ! अम्मा यह भी कहती कि अब्बा कि बूढी हड्डियाँ कब तक मेरा और मेरी बीवी समेत घर गृहस्ती का बोझ उठाएँगी ! मैं जवान था , हट्टा- कट्टा था ! सातवीं से आगे पढ़ा नहीं, न कोई हुनर सीखा तो मेरा बनेगा किया? मुझे अब्बे की बात का असर होता न अम्मा की बात का !
मैं तो था ही शुरू का धीट !
अम्मा का चालीसवां भी गुज़र गया !
हमारे यहाँ मौत घर वालों के लिए आर्थिक बोझ ही बनती है ! रिश्तेदार बोझ कम करने की जगह बोझ का कारण बन जाते हैं. कफ़न, कब्र, मौलवी साहेब, कुल, दसवां, चालीसवां !
फिर जिस घर में ऊपर तले दो मौत हो जाये और बिदा भी वह हों जो घर के सतून हों , जिन पर पूरा घर टिका हो तो अनुमान लगायें कि उस घर का किया होगा !
हमारे पास बचा हुआ कुछ होता नहीं था , जब होश आया तो पूरी तरह भिकारी थे !
मास्टर गुलाम नबी वाला ठेला अब्बे के मरने वाले दिन से उसी कोने में खड़ा था , जहाँ अब्बा उसे खड़ा कर गया था ! मैं जब भी उसे देखता तो सौदृश्य मेरी आँखों के सामने घूम जाते ! कैसे अब्बा अम्मी की मदद से अंतिम बार ठेला घर के अंदर लाया था ! मुझे भूलना असंभव लगता था कि उस शाम हमेशा की तरह फुलकित अम्मा, बेमकसद अब्बे के पीछे चलते, सेहन के पार दीवार तक गई थी जहाँ अब्बे ने रोजाना की जगह पर ठेला खड़ा करके कुरते की जेब में मुस्कुराते हुये हाथ डाला था ! उस दिन ऐसा महसूस हुवा था जैसे अब्बा दिन भर के जमा पैसे एक मिनट भी अपने पास रखना नहीं चाहते ! जो ख़ुशी उसे पैसे अम्मा के हाथ पर रख कर मिलती थी वह अति शीघ्र हासिल करना चाहता था !
बात फिर अम्मा अब्बा की शुरू हो गई ! लगता है मेरी ज़िन्दगी में और कुछ है ही नहीं ! जैसे मुझे कोई और बात आती ही नहीं ! जैसे मेरी ज़िन्दगी अम्मा अब्बा पर समाप्त हो गई हो !
लेकिन जीवन भी रुका है कभी?
जब रोटी के लाले पड़े तो मैं ने सोचा खुद तो मांग मांग कर खा भी लूं, लेकिन बीवी का किया करूं, ऊपर से एक और ज़िन्दगी आने वाली थी !
ज़िन्दगी यह नहीं देखती कि कोई कितना लाडला या कितना लापरवाह था
! ज़िन्दगी बेरहमी से अपना लगान मांगती है !
अब जब सर पर कोई नहीं था, जब और कोई चारा नहीं बचा तो मुझे बदलना पड़ा ! अब न अब्बा था कि सारा आसमान हमारे सर पर थामे रखे न अम्मा थी कि देखूं तो कलेजा ठंडा हो जाये !
अब मैं था, रज्जो थी और एक आने वाली रूह थी बस !
जब सब बदल गया था तो मैं खुद ही बदल गया !
अब कौन था जो मेरे लाड देखता !
मैं ने एक संकल्प के साथ ठेला सेहन के कोने में लगे पानी के नल के पास खड़ा किया और महीनों की जमी धुल मिट्टी को धो डाला ! लाल प्लास्टिक को कपडे धोने वाले साबुन से धोया और ठेला को सेहन में मार्च की धुप में सूखने के लिए खड़ा कर दिया !
अम्मा की संदूकची से बचे खुचे पैसे ले कर सुबह ही सुबह सब्जी मंडी पहुच गया ! दो की जगह एक गठ्ठा गन्ना खरीदा और साइकिल पर मुश्किल से बांध कर घर लाया ! मैं ने और रज्जो ने मिल कर गन्ने छीले और बड़ी कठिनाई से टेडी मीडी गंदेरियां काटीं !
सुबह सुबह मैं तराजू बाट जमा, ठेला ले कर निकला तो रज़िया मेरे साथ गली तक आई ! मुझे रुखसत करने लगी तो उसकी आँखें भर आई, यकीनन सोच रही होगी कि अब्बा अगर जिंदा होता तो मैं कभी भी इस काम में न पड़ता ! बस आवर गर्द सह्ज़दा ही बना रहता !
वक़्त भी इंसान को कया से कया बना देता है और कया कया करवा देता है !
ठेला ठेलते ठेलते मैं किताबों की उन दुकानों के सामने जा पहुंचा जहाँ अब्बा ठेला लगाया करता था !
मैं यह देख कर दंग रह गया कि एक बड़ी मूछों और फूले हुए पेट वाला फ्रूट चाट बेचने वाला ठीक उसी जगह ठेला लगाये धंदा कर रहा है जहाँ अब्बा का डेरा हुआ करता था ! मेरे ठेले पर नज़र पड़ी तो उसने मुझे घूर कर देखा और मूछों पर ताव दे कर लाल आँखें फेरीं, जैसे कच्चा चबा जायेगा ! मैं भयभीत हो कर झींपते हुए ठेला धकेलता कन्नी काट आगे निकल गया !बड़ी सड़क से पहले गली के नुक्कड़ पर बिजली के खम्बे के साथ मुझे ठेला खड़ा करने की जगह मिल गई ! मैं ने ठेला वहीँ खड़ा कर दिया !
जैसे जैसे समय बीतता गया , बाज़ार की रौनक बढती गई ! मेरा पहला ग्राहक आधा किलो गंडेरी खरीद कर ले गया तो मुझे लगा कि मैं दुनिया में जन्म लेने का मकसद पा गया हूँ!
मैं ने ख्यालों ही ख्यालों में दिन भर की कमाई रज्जो की हथेली पर रखी और मुस्कुराया !
अगले दो घंटों में दो किलो गंडेरी और बिक गई ! बिक्री में तेज़ी नहीं थी ! स्वयं को दिलासा दिया कि पहला दिन है, नया अड्डा है, धीरे धीरे ग्राहक बढ़ जायेंगे
शाम तक पांच किलो गंडेरी बिक गई !
कटी हुई गंडेरी में अभी भी काफी बच रही थीं !
मैं ने हिसाब लगाया कि अगर धंदा बंद करू तो उस वक़्त तक घर पहुँच जाऊँगा जिस वक़्त अब्बा पहुँचते थे !
तराजू बाट संभाले, बची गंडेरी को मलमल के कपडे से ढांक दिया और घर रवाना हुआ !
घर का दरवाज़ा खटखटाया तो रज्जो भागती आई, दरवाज़ा खोला और ठेले को मेरे साथ धकेलती घर के अंदर ले गई !मैं ने ठेला ठीक वहीँ खड़ा किया जहाँ अब्बा खड़ी किया करता था और ओक भर गंडेरी भर कर रज़िया कि तरफ देखा !
मेरा दिल भर आया !
ज़रा संभल कर मैं ने जेब में हाथ डाला और दिन भर की कमाई निकाल कर रज्जो के हाथ पर राखी !
यह लो भली लोक आज की वटक !
मुझे गन्नो के लिए रक़म नहीं चाहिए थी, आधे गन्ने अभी बचे हुये थे !
अगले दिन फिर मैं ठेला लेकर कल वाली जगह पर आ टिका !
अभी ठेला खड़ा ही किया था कि झाड़ू देना वाला झाड़ू लिए आ पहुंचा और पांच रूपये मांगने लगा ! पता चला कि यह रोजाना का भत्ता उसे सब ठेले वाले देते हैं. शुक्र है जेब में दस रूपये थे, उसे दे कर जान छुडाई !
आज ग्राहक कल की तुलना में आधिक थे ! दोपहर तक तीन चार किलो गंडेरी निकल गई ! मैं खुश था कि काम चल निकला है और शीघ्र ही अब्बे जितनी कमाई करने लगूंगा !
तीसरे पहर लगभग तीन बजे बाज़ार में एक शोर शराबा मचा !
सहसा दो ट्रक और दर्जनों कारिंदे तोड़ फोड़ करते हुये आ पहुंचे !
फ्रूट चाट वाला मछन्दर ठेला भगा कर नजदीकी गली में घुस गया ! मैं आश्चर्यचकित, बदहवास स्थिति को समझने की कोशिश ही कर रहा था कि मेरा ठेला और गंडेरी पर क़ब्ज़ा करके बाकी सामान भी ट्रक पर लाद दिया गया ! मैं ने भाग कर ट्रक पर चढ़ने की कोशिश की तो एक डंडा मेरे सर पर पड़ा और एक थप्पड़ मेरे मुंह पर ! मैं दर्द और अपमान के कारण पत्थर हो गया !
देखते ही देखते नगरपालिका के कारिंदे और ट्रक मेरा सारा संसार ले कर गायब हो गए !
शाम गए मैं लुटा पिटा घर पहुंचा !
रज्जू मुझे यूँ बदहाल देख कर बहुत दुखी हुई !
अगली सुबह और भी बुरी निकली !
मास्टर गुलाम नबी सुबह सुबह आ धमका ! बोला अब्बा की शराफत की वजह से उसने कई महीने से ठेले का किराया नहीं लिया था और अब ठेला ही चला गया !उसने हाथ जोड़ कर कहा कि वह जुरमाना भर कर नगरपालिका से अपना ठेला वापिस ले आएगा और बाकी किराया भी नहीं मांगेगा ! लेकिन अब मुझ जैसे निकम्मे में को ठेला नहीं देगा !
मैं और रज्जो इतने परेशान हुये कि हमारे मुंह से कोई दलील भी नहीं निकली ! बस टिक टिक क्रोध से भन्ना कर उसे जाता हुये देखते रहे !
उसके जाने के बहुत देर बाद तक भी हम में से कोई कुछ न बोला !हम बस जड़ हो कर रह गए !
ऐसा लगा जैसे अम्मा अब्बा की मोहब्बत की निशानी कोई हम से छीनन कर ले गया हो !
जैसे हमारे घर की रौनक छीन गई हो!
जैसे जीने की आशा धीमी पड गई हो!
दो दिन तक हम इस सदमे से बेहाल रहे ! रज्जू घर के कम काज में दिल लगाने की कोशिश करती लेकिन घूम फिर कर खली खली मेरे पास आकर बैठ जाती !
मैं ने कोशिश की के घर से बहार कोई व्यस्तता ढूँढूं, काम धंदे का कोई रास्ता निकालूं लेकिन कुछ भी समझ में नहीं आया !
इस खाली खोखलेपन को भरने लिए एक दिन मैं सड़कों पर निकल आया ! शाम तक आवारा घूमा किया ! थक गया तो कटी पतंग की तरह डोलता एक चौक में बने फौवारे के चरों ओर बने चबूतरे पर बैठ गया !
चौराहे पर गहमा गहमी नहीं थी ! जब लाल बत्ती एक तरफ की गाड़ियों को रोकती तो सिग्नल खुलते खुलते पांच सात गाड़ियाँ खड़ी हो जातीं ! दो भिकारी लड़के और एक बूढी औरत गाड़ियों के बंद शीशों पर दस्तक दे कर भीख मांगते !एक अधेड़ उम्र आदमी जिसका एक बाजू कटा था गाड़ियाँ साफ़ करने के कपडे के टुकड़े बेच रहा था ! सहसा मेरी नज़र पंद्रह सोलह साल के एक लड़के पर पड़ी जो सरकंडे पर लाल्गुलब और सफ़ेद चमेली के फूलों वाले गजरे बेच रहा था ! उस लड़के के कपडे साफ़ और बाल तेल लगा कर कंघी किए हुये थे ! उसने एक कान में चमेली का फूल अड़स रखा था और उसके चेहरे पर मासूमियत तैर रही थी !
मैं ने गौर किया तो मुझे ये लड़का चौक में मौजूद सभी कारोबारी लोगों से उत्तम और दिलचस्प लगा !
अचानक मेरे मस्तिष्क में एक विचार आया और जाने कितने दिनों के बाद मेरे चेहरे पर मुस्कराहट फैल गई !
मैं चबूतरे से उठा और तेज़ क़दमों से चलता हुआ अपने मोहल्ले की ओर चल पड़ा !
हमारी गली की नुक्कड़ पर शेह्बाज़ फूलों वाला हमेशा की तरह अपनी दुकान सजाये बैठा था !
“यार शेह्बाज़ मुझे गुलाब के फूल और चमेली की कलियाँ चाहिए.”
मेरी बात सुन कर वह आश्चर्यचकित हो गया !
खैर मैं ने बहुत बेहतरीन ताज़ा फूल खरीदे और घर की ओर चल पड़ा !
रज्जो ने मुझे आते देखा तो उसके चेहरे पर इत्मिनान और आँखों में चमक आ गई !
“रज़िया रानी! मुझे गजरे बना दो, मैं गजरे बेचूंगा.”
रज़िया ने हैरत से मुझे देखा. कुछ कहने को मुंह खोला, लेकिन कुछ बोले बिना पैकट लेकर कमरे में घुस गई !
रात बैठ कर रज्जो ने बड़ी लगन से रज्जो ने पचीस गजरे बनाये ! इतनी हुनरमंदी से कि दिल खुश हो गया ! हमें पता था कि गजरे आमतौर से शाम में बिकते हैं इसलिए हमने गजरों को पानी छिड़क कर ताज़ा रखा ! शाम से पहले मैं गजरे सरकंडे पर सजाये घर से कोस भर दूर उस चौक पर जा खड़ा हुआ जिस की एक ओर एक बड़ी मार्किट का रास्ता था और दूसरी तरफ बड़े बड़े फ्लैट वाली ऊंची बिल्डिंग थीं !
शाम तक मेरे दो तीन गजरे ही बिक सके !
मुझे घर की चिंता थी, रज्जो से प्यार था और आने वाले बच्चे के लिए मेरा दिल मोहब्बत से भरा हुआ था. मुझे कम से कम इतनी रक़म कमानी थी कि मैं घर चला सकूँ !
मुझे सब गजरे बेचने थे !
एक एक गजरे की कीमत मेरे आने वाले भविष्य के सुरक्षा की ज़मानत थी !
हर बिकते गजरे के साथ मेरे विश्वास दृढ हो रहा था !
रात होने पर लोग जोड़ों के रूप में पार्टी के लिए निकले तो गजरों की बिक्री में तेज़ी आई !
फिर काफी देर तक बेकार इंतज़ार करना पड़ा !
उसी बीच सबसे आधिक मज़ा एक सत्तर पचत्तर साल के जोड़े को गजरा बेच कर आया ! बूढ़े मर्द ने बड़े चाव से गजरा खरीद कर अपने कांपते हाथों से अपनी हमउम्र महिला को पहनाया ! मुझे अब्बा और अम्मा याद आ गए और मैं दुखी हो गया !
“यकीनन आज इस बुज़ुर्ग जोड़े की सालगिरह होगी.”
मेरे मस्तिष्क में खेयाल आया !
पचासवीं शायद !
मेरा दिमाग आवारा होने लगा !
लेकिन इससे किया अन्तर पड़ता है ! यह तो पहली सालगिरह वालों से आधिक खुश और संतुष्ट लग रहे हैं !
इस उम्र में भी एकदुसरे में खोये हुए !
रात भीगी तो एक और तरह के ग्राहक आने शुरू हो गए ! वह जिन्हें देखते ही पता चलता था कि रात भर का प्रोग्राम बना कर आये हैं !
गजरे बेचते बेचते लगभग आधी रात बीत गई ! मैं ने रज्जो के इंतज़ार का सोचा, लेकिन फिर यह निर्णय लिया कि मेरे कामयाब कारोबार का यह पहला दिन है, मैं रज्जो को समझा दूंगा कि इतनी रात गए क्यूँ वापिस आया हूँ, लेकिन सब गजरे बेच कर ही जाऊँगा !
रात डेढ़ के आस पास मेरे पास केवल एक गजरा रह गया !
जेब में रखे रूपये की गर्मी मैं अपने सीने में महसूस कर रहा था !
अब सड़क पर इक्का दुक्का गाड़ी बहुत देर बाद आ रही थी !
सड़कें सुनसान होने लगीं ! चौक के सिग्नल लाल और हरी बत्ती की जगह पीली बत्ती की रौशनी बिखेरने लगे ! इसका मतलब था कि अब इस चौक में इशारे के हरे होने के इंतज़ार में गाड़ी खड़ी करना ज़रूरी नहीं !
मैं ने अपने आखरी गजरे पर नज़र डाली !
इसी बीच एक बड़ी सी शानदार काली गाड़ी आकर मेरे सामने रुक गई ! पिछली सीट का शीशा खुला, एक अधेड़ उम्र का बेहतरीन लिबास पहने , जिसका गुलाबी चेहरा चमक रहा था नज़र आया ! आँखें नशे से बोझिल थीं ! साथ की सीट पर कोई बाईस तेईस साल की नवजवान लड़की थी जिसका हुस्न नज़र डालने की हिम्मत भी छीन रहा था लगभग अधलेटी मर्द के ऊपर गिरी पड़ी थी !
“मुझे गजरा दे दो.”
मुझे मर्द की लड्खादी आवाज़ सुनाई दी.
मैं जडवत खड़ा रहा !
लड़की ने मदहोशी में अपना बाजू ऊपर उठाया और गोर बाजू की खूबसूरत कलाई पर अपने दुसरे हाथ से वृत्त बनाया कि गजरा कहाँ चाहिए !
मर्द ने दोबारा हाथ निकाल कर मुझे इशारा किया !
“गजरा दे दो.”
मैं फिर वैसे ही खड़ा रहा !
मर्द का हाथ उसके लिबास में गायब हो गया ! वापिस निकला तो उसके हाथ में पांच सौ का नया नोट था जो उसने मेरी तरफ बढाया !
“लड़के यह सरे पैसे ले लो और गजरा मुझे दे दो.”
मैं ने थोड़ी देर के लिए सोचा, पांच सौ का नया नोट सामने लहरा रहा था !
मुझे फैसला करने में ज़रा देर न लगी !
मैं दृढ संकल्प के साथ एक कक्दम पीछे हट गया !
खिड़की की तरफ नज़र डाली तो हसीना अभी भी अपनी गोरी गुलाबी कलाई पर दुसरे हाथ का वृत्त बनती गजरा पहन रही थी !
यह इशारा मदहोश मर्द की बेताबी को तीव्र कर रहा था !
अचानक मुझे उस गोरी कलाई की जगह रज्जो की खुरदरी सांवली कलाई नज़र आई और गायब हो गई !
मेरा संकल्प अटल था !
गजरे ख़त्म हो गए बाबु जी !
मैं दो कदम और पीछे हटा और अपने घर की तरफ मुंह करके तेज़ तेज़ चलने लगा !
चाँद कदम चल कर मैं ने मुड़ कर देखा तो गोरा मोटा पांच सौ रूपये का नया नोट अभी तक मेरी तरफ लहरा रहा था !
मेरी रफ़्तार मेरे घर की ओर और तेज़ हो गई !
रज्जो मेरी प्रतीक्षा में होगी और अम्मा की ओक भर गंडेरी मैं किसी कीमत पर नहीं बेच सकता !
पांच सौ में भी नहीं !
यह मेरी शहज़ादी का गजरा था !
आखरी बचा हुआ गजरा !

Story: last gjrạ
Ḵtھạ: Javed Anwar, Pakistan
Hindi Ạnwwạd: Sadaf Iqbal, MQM

Last gojra
Javed Anwar, Pakistan
Translation;
Member of sadafa, m’s bajaj
………………..

And then we got married.
Razia was the enemy of my dreams.
But dreams are of everyone and the martyrs of dreams too!
What did I do to give her? However, he was happy that he could not make anyone an enemy. I could only make the enemy of dreams!
The Rope of cācē phazaladīna was not only mine, but I had a lot of dreams like me, and we were only śahjādē!
The Prince of his mother, narrow parched streets, stinky open drains, and on their banks, are addicted to the makkhīyōṁ, without washing the face, to make the whole day a loafer!
One day school and two days on baba malang shah’s fun court coming back to a stroll!
A few years passed away in a kilāsa, the princes who receive the title from the ustadz!
It is we who call the likes!
” O, you are also the enemy.”
Well!
In these circumstances, if there was a enemy of my dreams, how could anyone protest on this! Someone came to know me and the rajjō to be a booed!
And the one who knew us was just like me! Whose dreams of dreams were just like rajputana!
” O, go, you are also addicted.”
My Father’s cucumber was walking like a home from the house of marōṇḍē, and the truth is that it was going to be very difficult!
Someone said to get more money to sell sugarcane! Just started learning to peel off the gandēriyāṁ from cācē karamadāda in the evening! A week training was enough! From Cane to sugarcane, he will bring the hare green, long and fat, sugarcane cane from sugarcane, by purchasing the morning from the father’s market, he would bring a bicycle to a bicycle. Peel the skin with the bark!
Abbē had taken a wooden cart from the master slave prophet! A pile of sweets are being cut off by toke the sweet ganaḍēriyōṁ! A Red-coloured plastic umbrella on Abba heel, deposit a large piece of snow on the top of the sweet gaṇḍērī on a queue! Bought from a martyr’s shop after this decoration, the aromatic fresh leaves of the indigenous rose would be sprinkled! The scales are put in the clothes tied under the push! Then a long tote of sugarcane would go to the bottom of the lower eating! Honey spiders and angry people come to the woods, licking the the, fly without cutting!
Moments of life, afternoon, day and months passed! The age has been looted such as abbē’s gandēriyāṁ!
Cut Cut, cut, cut cut……..
And our whole house kept on a blast at the cut of abbē’s tokay!
Cut Cut, cut cut….
Crescent, crescent…
Father, who does work by doing the work, he keeps on the hands of amma!
I’ve never seen the screams of amma angry with amma!
My Father-in-the-night gets tired! Along with the push of the attic, the sweet fragrance of the lost and the sweet fragrance in our closet!
If amma would lie, he would get up immediately! Forward the next side of the abbē’s cart to help the abbē park in the house of the house! In the courtyard of the raw courtyard, draws a light lines on the final end of the trolley! My Father’s leftover ice and gandēriyāṁ first handed over to amma! Mother of amma give me my little sister full of words! If you still survived, then wrapped in a wet sack and punishment on plastic in the corner of the closet! I do not remember that one day that our father has come to us, we have not brought the ganēdiyām̐ of our part!
My Father opened his head and then rubbing his hair with his head and caress his pierced hair!
Take off the shoe by throwing it out of the shoe, and the rest of the day and dust, then put it under the bed!
My Father rubbing some naked feet and then put his hand in his pocket and then put his hand in his pocket and put it on the palm of amma.
ले भई, भली लोक ! आज की “ वटक”.”
Amma read bismillah by counting the money and give up a few left money in the pallu! The power of electricity, gas, water, milk, ration, claim-alcohol, our fees, book copy, clothes-Rags, have to be paid!
We were two sister-brothers, not because of any kind of family planning, but of a physical illness! My Father was happy at this point! Mother, sometimes i regret that I had no brother who becomes a eagles and there was no sister of guddu who made her friend! I do not have a lack of brother’s lack, that mohalla was full of my friends, and no other sister was needed!
Guḍḍō I was so cute that all my attention and Sarah love was less for him!
If the story of my story is so far from the story that we had a lot of fun and there was no special problem, it would be awful forgotten!
The blood of mother’s embroidered is over, so we find out that there will be no curd in breakfast and there will be dry bread instead of paratha! She probably left the night, stale!
We had a habit to deal with this situation! We knew that this is the only possible thing that amma and Abba could make us available! They did not hide anything from us, nor did they protect us. If all sorrows were sharing, then complained, how is the complaint?
But the fact was that of me and the rajak! Where do we take the story of amma and amma! He didn’t know which soil was made! But it was one of the same soil, that we were also known!
I fucked up the ammi and Ammi! I didn’t feel ashamed to waste the fees of hard work! It was just fun, I ran into my teammate as if life was a joke! The Galaxy was seen at every glance! Every Mirage was hit by the river but the sea was seen!
Guddu was younger than me, the fifth passed the house and became the helper of mom!
They say girls get big soon! Guddu was not yet much bigger that the nazeer was cast in the palanquin! The town of nazeer was not far away from our city, yet it was so far that we didn’t even want to meet a four months ago! After the death of his father, the precedent before his marriage was that of his father, a small cycle of bicycle puncture. Very hard to spend home expenses! By the coming of guddu, he lost the worry of the house, because it was a good thing that a good house would have been in spite of a small age. He made it so important in his in-laws to raise his responsibilities so that the nazeer and his mother think of the right to the left, his home will fall!
I see a glimpse of amma in guddu!
Ammi and ammi was the joy and peace of this thing that guddu has become so important in his house! They didn’t see their sadness at the beginning of the wedding! Gradually he suffered a huge loss!
My loafing and abbē cut cut cut…. my life was going through a lot of fun!
There is no friendship with cācē fazaladīna and my mother does not think that she is a little sister, then I don’t even uproot the reckless boy from a hair of a rope!
Became the daughter of rajputana amma!
On the word of guddu, ganēdiyām̐ will now become a part of rajjō every night!
Don’t make me, don’t make anything!
The only “Prince of prince” has been!
Reckless, khalaṇḍarā!
Someone’s father should not die!
And then you should never die like my father!
So, when such a father is beating, then ammar is not alive even in the life!
This is what my bae did with me!
One evening healed back from work! Our Oak around reached us! Amma’s routine ended! My Father slept on the roof by preparing dinner for the morning!
I climbed the sun in the morning, but my father did not pick up! Mother told me to wake up! If you get up, then I will make them cut off for time! If you don’t woke up, it will be angry that the whole day is bad! Perhaps you have slept very tired, who has slept! Amma got to make the paratha! I wake up to the attic on the stairs! Saw that he was lying on the bunk! The ḍabbiyōṁ giggle has fallen down on the raw roof below!
When I called my hand on the forehead, my father did not pick up!
Then my father never woke up!
Never!
If you woke up with the leaves of the native rose, then amma, guddu and rajjō have done with pain! The ladies of the neighborhood brought them back from the corner of the street!
If their bus moves, then you will go to graveyard.
Then how I live home!
Abbē had to run away for burial!
The close cemetery of the neighborhood, near the big old population, was full of graves! When I was playing in the cemetery when I was playing, I thought how the dead would live in the way? It would be hard to take up! Today, when my father needed a place for the grave, the problem has come out!
There was no place for the fresh grave! Friends, friends, took a place from gorakhpur! When the time came to be buried, I felt that the grave was probably old and made a new skin! I was the noise of the noise that I came to know which of my father used to use all things new! How many times he used to live a lot of joy with the objects used innumerable times! I felt so hard that there would be no objection on someone’s old grave!
Neither did i objected, nor the father of Abba, and we both happy and happy to be satisfied with the grave!
A useless idea in my mind, despite so much shock, where has he come from! My mother also had another wedding from my father! After being a widow in a very young age, a virgin bride must have been ras, who had been married to that widow! We were not able to decide that my father is more happy with amma, or with amma father! We were so hard and good to see both of the good times from the shoulder. One soul saw the boat of a two body, safe life! Both of them were mandatory for each other that no house could be imagined without any one!
After marriage, amma may have never been married. Once she went for seven days on my grandmother’s insistence, my father came to the third day.,” our house doesn’t run.”
I guddu used to cook even in the presence of amma! The Father who did not even know that mother had created or guddu in his śāgirdī! But when the mother of amma gave food to my father, it seemed as if they were not getting away from her throat!
He said, take the pot. Your Mother has not taught you to cook like myself.”
Me and guddu would have been smiling by looking at each other!
Hey, then amma and my father started!
I probably don’t know any more!
My Father is dead, amma does not cry!
Just amma is not amma!
It seems like a strange soul is dragged away by the recognize.
Like a dead doll, dusting, dusting, roams away!
Rises in the morning, pray to the prayer and leave the cemetery! Read the fatiha by standing on the grave’s grave, reading will be read! If standing standing, it would have been read! A lot of sunlight would go back to the path of return! Don’t eat food just like eating! Never take two kaur ever! Amma remained half till the tenth of the nineties and she was shot up from the bed till the th!
Just two months and after four days of departure, amma was also farewell!
Grave arrangements for amma done by Father’s friends! There was a grave place at the distance of eight ten graves from Father’s grave!
After the death of my father and amma, me and rajjō became unclaimed! My Father I was almost useless! To Peel more cane and bite the gandēriyāṁ, I used to help my father! My Father took away the market and I went to the drifter! There were no more rage! Just got me comfortable and often explains that I had married and I should be responsible! I can hear the head down and make no impact!
Amma is more emphasis and shame on being married even I was gairajim’mēvāra! If the child is born tomorrow, then it will also be increased! Amma also said, ” how long will my father bear the burden of a house with me and my wife I was a young man, I was a soldier! Don’t read beyond the seventh, nor have I learned any skill? I would have been affected by the words of amma!
I was the beginning of the beginning!
The Cālīsavāṁ of amma also passed away!
There is a financial burden for the people of death here! A place to reduce relative burden becomes a cause of burden. Shroud, grave, cleric saheb, total, tenth, cālīsavāṁ!
Then, in the house, there may be two deaths in the house, and there are those who have the houses of the house, and guess that the house will be done.
We had nothing to save, when the senses came, they were completely awestruck!
The Master servant of the prophet was standing in the corner of the dead day of death, where father was standing by him! When I look at him, the aesthetic would have turned to my eyes! How did my father get the last time with the help of ammi ammi! It was impossible for me to forget that the evening was as always a fuller amma, on the back of the bēmakasada bay, to the wall of resist, where he had put a smiling hand in his pocket by standing at a place in the daily place! That day I felt like my father wouldn’t want to keep his money even a minute. The happiness that gave him money on the hands of amma, he wanted to achieve very soon!
Once again amma started my father! Looks like there’s nothing else in my life! Like I don’t get any more talk! Like my life ended on amma Abba!
But life also stopped?
When I fell in the red of bread, I thought I should ask for a demand, but do the wife, there was another life coming from the above!
Life doesn’t look at how much a son or so reckless
! Life is brutally ask for its rent!
Now when there was no one on the head, I had to change when there was no choice! It was not my father that the whole sky should hold on our head, it was my mother that if i see, my heart would be cool!
Now I was, the rajjō and the soul had a coming soul!
I changed myself when everything changed!
Who was the one who sees my stick now!
I stood up with a resolution in the corner of the water tap to the tap of the water and washed the frozen dust of the month! Washed Red Plastic with laundry soap and jamming to dry in the sun of March in resist!
After taking money from amma’s case, I reached the vegetable market early in the morning! The two had bought a gaṭhṭhā cane and brought home with a hard tie on the bicycle! Me and the rajjō splashed sugarcane and way teddy mīḍī with great difficulty!
In the early morning, I got the balance butt, when I took the trolley, Razia came to the street with me! When I started to stop, her eyes were filled, sure I would be wondering if my father was alive, I would never have to do this! Only the dust remains rebuked!
Even time makes a man what he makes and what he makes!
Shove push push I reached the books of the books where my father used to shove!
I was stunned to see that a big moustache and a fluffy stomach with a fluffy stomach is being pushed into the right place where my father used to be dera! She looked at me when she looked at me and made her red eyes on the moustache, like you would eat raw. I’m afraid of being scared of the jhīmpatē jamming jamming! I got a place to stand up with lightning on the street corner before the big road! I parked the trolley!
As time went by, the market of the market increases! My first client bought half kg gandaki so I felt that I was able to take birth in the world!
I kept my thoughts on the palm of the rajjō on the palm of the day and smiled!
Two kgs and sold in the next two hours! The sale wasn’t faster! Console yourself that is the first day, the new adda, gradually the customers will grow.
Kgs sold out until evening!
Still had a lot of escape in the cut gaṇḍērī!
I have estimated that if i stop the better, I will reach home when the time reaches my father!
The balance of the balance, the left-to-the-Gaṇḍērī was given to the cloth and left the house!
When I knocked the door of the house, I opened the door, opened the door and took her to the house with me! I stood right where my father stood up and filled the oak with the oak.
My heart is full!
Be careful, I put hands in the pocket and remove the money of the day and rakhi on the hands of the rajjō!
Here you go good guy today!
I didn’t want blood for gannō, half of the cane was left right now!
The next day then I came to the place yesterday with the trolley!
I had just stood up for the broom and asking for five rupees! Find out that this daily allowance gives him all the push. Thankfully, there were ten rupees in the pocket, give it to him!
Today customers were more than yesterday! Three four kg gaṇḍērī out until noon! I was happy that the work is going on and will soon be earning as much as you can!
At least three o’clock in the market, there’s a noise shouting!
Two trucks and dozens of cars broke up while breaking up!
A Fruit Chaat with a fruit-licking trolley went to the nearest street! I was surprised, trying to understand the situation that the rest of the goods were on my cart and the boundaries and the rest of the goods were on the truck! I tried to climb to the truck and put a stick on my head and a slap on my mouth! I got stones because of pain and humiliation!
The Municipality’s cars and trucks have disappeared by taking my whole world!
Went to the evening I got my home!
Rajju was so sad to see me like this!
The next morning even bad turned out!
Master Slave Prophet in the early morning! He said that he did not pay the rent for many months, and now he walked away! He added his hand and said that he would bring back his back from the municipal municipality and not the rest of the rent! But now I won’t shove the scum like me!
Me and rajjō so upset that our mouth didn’t even get any proof! You’re just going to see her going through a ticking anger!
We did not say anything about the long time he had gone! We just became the root!
It seemed like the sign of amma’s love has been hidden from us!
Like the shine of our home has been snatched!
The hope of living is slow!
For two days we were suffering from this shock! Rajju tries to put a heart in less than the house, but then empty empty khali came to me!
I find any appointments outside the home of the tried, but I don’t understand anything.
One day I came out on the streets to fill out this empty khōkhalēpana! Strolling around the evening! When tired of a kite like a kite, he sat down on the variables of the phauvārē in a square.
There was no gahamā in the crossroad! When Red lights stops one side vehicles, five seven cars are standing open to open the signal! Two bhikārī boys and an elderly woman knocking on the close of the vehicles! A young age man who was selling a side of cars was selling pieces of clothes cleaning! Suddenly my gaze was on a boy of sixteen years, who was selling lālgulaba and white jasmine flowers on the sarakaṇḍē! The Boy’s clothes were clean and combed the hair! She kept the flower of Jasmine in a ear and the innocence was swimming on her face!
If I noticed, I felt better and interesting than all the businessmen present in the plaza!
Suddenly I had an idea in my mind and knows how many days later I had a smile on my face!
I woke up from the ramparts and went to my neighborhood with fast steps!
At the corner of our street, there was always a flower in the corner of our street!
” friend, I should have the flowers of roses and jasmine.”
He was surprised by listening to me!
Well I bought awesome fresh flowers and walking home!
When the rajputana came to me, there was a surprise in his face and the eyes were shining!
” Razia Queen! Make me gajju, I will sell the gazette.”
Razia looked at me strangely. Something opened to say, but something went into the room without saying anything!
By sitting in the night, the rope has made a huge dedication to the rope. That heart was happy with so much conscience! We knew that gajraj is usually sold in the evening, so we refreshed the gajarōṁ by sprinkling water! Before the evening, I went to the house of I, from the house to the kos, who was on the road to a large market, and on the other side there was a big flat high building!
My two three gazette could be sold by the evening!
I was worried about the house, love the rajputana and my heart was full of love for the coming child. I was at least so much blood that I could go home!
I sold all the Gazette!
The Price of a gajalakshmi was a guarantor for my future safety!
My faith was getting strong with every sold Gazette!
After the night people came out for the party as couples, the sale of sales came faster!
Then had to wait for a long time!
The most great fun in the meantime has sold a-Year-old couple of gajarā! The old man had to buy a woman from his trembling hands and made his own age woman. I remembered my father and amma and I was sad!
” sure will be the anniversary of this old couple today.”
My brain came in!
Pacāsavīṁ maybe!
My mind began to stray!
But it makes the difference! This is so happy and satisfied with the first anniversary!
In this age too, lost in ēkadusarē!
Night wet so another kind of customers start coming! Those who saw that the overnight program had been made!
It’s almost half of the night selling the Gazette! I thought of waiting for the rajak, but then decided that this is the first day of my successful business, I will explain to the rajjō why I have come back so long, but all the tusks will be sold!
I got only a gajarā around the night and a half!
The Heat I put in my pocket was feeling in my chest!
The Ace two cars on the road now coming too late!
The roads started getting dreary! The Square Signal of red and green light began to light the light of yellow light! It meant that there is no need to make a car standing in waiting for the signal to be green in this square!
I looked at my last gazette!
In the meantime, a great black car came in front of me! The last seat glass opened, wearing a best dress of an aged age with a shining pink face! The eyes were heavy heavy! There was no twenty-two years old young girl on the side of the seat, whose beauty was snatching the courage to look up, almost a man fell down over the man!
” give me a gajarā.”
I heard the fight of the man.
I’m standing in the woods!
The girl picked up her own side and made a circle with her other hand on the beautiful wrist of gore’s side where the gajarā should be!
The man pointed out to me again!
” give gajarā.”
I’m standing anyway!
A man’s hand disappeared in his dress! When he turned back, his hand had five hundred new notes which he made to me!
” boys take this money and give me a gajarā.”
I thought for a while, a five hundred new note was waving in front of it!
I didn’t like to judge!
I just went back a cocktail with determination!
Look at the window, beauty was still wearing the other hand circle on her white pink wrist!
This gesture was intense the crazy man’s anxiety!
Suddenly I looked at the roughness of the white wrist of the rajjō and disappeared!
My resolution was adamant!
It’s finished, baby!
I took two steps and moved back and walking fast to my home!
When I looked back at the moon, I saw the white five rupees new note was still waving at me!
My speed went to my house and faster!
The rope will be waiting for me and I can’t sell it at a price.
Not even in five hundred!
It was a gajarā of my shahzadi!
Last left gajarā!

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